Manoj sharma 12th fail एक कहानी जो जिंदगी बदल दे

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12th fail एक ऐसी कहानी जिसे पढ़ के या देख के आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे ये कहानी है एक ऐसे युवक कि जो अपनी परिस्थितियों से हार नही मानता , जो लाख दुश्वारियों के सामने भी अपना हौंसला नही खोता ,जो बहुत ही मेहनती लड़का है

कौन है मनोज ? (Manoj sharma 12th fail)

ये वही लड़का है जिसे 12th fail movie में दिखाया गया है जी हाँ दोस्तों यहाँ बात हो रही है चम्बल के उस लड़के मनोज कुमार शर्मा की जो 12th में fail होता है लेकिन बाद में अपने अथक प्रयासों की वजह से सफल होता है तो चलिए कहानी शुरू करते हैं

Manoj kumar sharma 12th fail एक कहानी जो जिंदगी बदल दे चंबल के पास के एक गाँव का रहने वाला है गोंव के स्कूल में ही वह पडता है वह स्कूल विधायक का स्कूल है और इसीलिए वहां हर साल बच्चे नक़ल करके पास होते हैं परन्तु एक बार जब मनोज 12th क्लास में थे तब उस स्कूल में एक इमानदार पुलिस अफसर कि ड्यूटी लगती है है और उस साल नकल न होने कि वजह से सभी बच्चे fail हो जाते है और मनोज कुमार शर्मा भी उनमें से एक होते हैं और इसीलिए Manoj kumar sharma 12th fail के रूप में जाने गए

उस पुलिस अफसर को देखकर मनोज बहुत impress होते है और उनसे कहते हैं कि मैं आप जैसा बनना चाहता हूँ और इसके जवाब में वे पुलिस अफसर कहते है कि इसके लिए तुम्हें मेहनत करनी होगी और नक़ल करना छोड़ना होगा और ये बात मनोज को इतना प्रभावित करती है कि वह अगले साल कड़ी मेहनत करता है और वह अकेला बिना नक़ल करे पेपर लिखता है …इस exam में पूरा स्कूल 1st डिवीज़न में पास होता है क्यूँ कि सबने नक़ल की थी और मनोज ने बिना नक़ल 3 rd डिवीज़न में exam पास किया

मनोज का संघर्ष (Manoj kumar sharma 12th fail)

अब मनोज मेहनत करता है और अपना ग्रेजुएशन complete करता है और फिर वह PCS कि तैयारी के लिए ग्वालियर जाने के बारे में सोचता है पर पर इसके लिए उसके पास पैसे नहीं होते ऐसे में उसकी दादी बरसों से बचायी अपनी पेंशन उसे देकर कहती है कि वापस आये तो पुलिस अफसर बनकर ही आना इस तरह वह पहली बार अपने गाँव से बाहर शहर जाता है लेकीन कहते हैं न कि कुछ बड़ा पाना है तो परीक्षाएं बहुत देनी पड़ती हैं शहर पहुँचते ही उसे पाता चलता है कि उसका सारा सामान बस में ही चोरी हो चुका है अब न उसके पास सामान है न ही पैसा ….घर वो वापस जा नही सकता क्योंकि सबसे अफसर बनने का वादा कर के आया है

2 -3 दिन वो भूखे प्यासे ग्वालियर के स्टेशन पर ही बिता देता है और थक हर कर वो एक होटल वाले से खाना मांगता है बदले में कोई कम करने कि बात वह कहता है होटल का मालिक उसे खाना दे देता है वहीँ उसे एक और युवक मिलता है जो दिल्ली जा रहा होता है UPSC की तैयारी के लिए बातों बातों में वह लड़का उसे बताता है कि आईएस DSP से बड़ा होता है ये सुन कर मनोज उस upsc aspirent के साथ हो लेता है

दिल्ली पहुँच कर वह अपना खर्च चलाने के लिए टॉयलेट साफ़ करता है वह लाइब्रेरी में भी काम करता है वह आटा चक्की में भी काम करता है और इस सब के साथ ही वह अपनी पढाई भी करता है मनोज को english नही आती वे hindi मीडियम के अभ्यर्थी हैं और अंग्रेजी कि इस दुनिया में hindi माध्यम के विद्यार्थी का अपना अलग ही संघर्ष है

मनोज के पास पैसा भी नही है इसी दौरान उसके पिता कि भी नौकरी चली जाती है जिससे अपने घर कि ज़िम्मेदारी भी उसी के कन्धों पर आ जाती है इसलिए उनको और भी एक्स्ट्रा काम करना पड़ता जिससे कि वे अपने खर्चे के साथ अपने घरवालों का भी खर्च भी उठा पाएं

कामयाब मनोज

मनोज कुमार शर्मा ने अपनी इस यात्रा में कुल चार बार upsc कि परीक्षा दी जिसमें से दो बार वे प्रीलिम्स में भी पास नही हो पाए उन्होंने दो बार मैन्स लिखा जिसमें से अपने अंतिम प्रयास में वे इंटरव्यू में पहुँचते हैं और उसमें कामयाब भी होते है आज मनोज कुमार शर्मा एक सीनियर आईपीएस अफसर हैं

मनोज कुमार कि पत्नी श्रद्धा भी एक आईएएस अफसर हैं और श्रद्धा मनोज का एक मज़बूत support system रहीं हैं उन्होंने मनोज कुमार शर्मा का उनकी success journey में बहुत साथ दिया

आज कि तारीख में दोनों एक इमानदार अफसर हैं, दो बच्चों के पेरेंट्स हैं ,और एक दूसरे के साथ एक खुशहाल जीवन जी रहे हैं

सीखें मनोज कुमार शर्मा से

मनोज कुमार शर्मा कि इस कहानी से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है वो एक ऐसे बैकग्राउंड से आते हैं जहाँ लोग आईएएस आईपीएस के बारे में जानते तक नही हैं जहाँ के बच्चों को अंग्रेजी आना तो दूर है बल्कि अंग्रेजी से डर लगता है बच्चों को ऐसी जगह से belong करने वाले मनोज शर्मा ने आईपीएस बनने का न सिर्फ सपना देखा बल्कि उसे साकार भी किया

मनोज ने अपनी राह में आने वाली हर परेशानी का जमकर मुकाबला किया, कभी उन्होंने अपनी बाधाओं के आगे घुटने नही टेके बल्कि अपनी मेहनत और दृढ इच्छा शक्ति से उन्हें करारी मात दी

शहर कि चकाचौंध में आकर उनकी आँखें चौंधियाई नही उन्होंने हमेशा ये याद रखा कि वो कहाँ से और क्यों आये है जबकि ज्यादातर गाँव के students पढने के लिए शहर आ तो जाते हैं पर यहाँ कि चमक धमक में खो कर रह जाते हैं

मनोज कुमार शर्मा का यह प्रेरणास्पद लेख यदि आपको पसंद आता है तो इसे अपने दोस्तों के साथ और परिवार के सदस्यों के साथ ज़रूर share करें ताकि और लोग भी मनोज कुमार शर्मा कि life से motivate हो सकें …धन्यवाद

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